Thursday, 19 February 2015

Sri Rudrashtakam

श्री रुद्राष्टकम... नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् | निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेङहम् ||१|| निराकारमोंकारमूलं तुरीयं गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् | करालं महाकालकालं कृपालं गुणागारसंसारपारं नतोङहम् ||२|| तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरं मनोभूतकोटि प्रभाश्रीशरीरम् | स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगंगा लसदभालबालेन्दुकण्ठे भुजंगा ||३|| चलत्कुण्डलं भ्रुसुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् | मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि ||४|| प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम् | त्रयः शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं भजेङहं भावानीपतिं भावगम्यम् ||५|| कलातिकल्याण कल्पान्तकारी सदा सज्जनान्ददाता पुरारी | चिदानंदसंदोह मोहापहारी प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ||६|| न यावद उमानाथपादारविन्दं भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् | न तावत्सुखं शान्ति संतापनाशं प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ||७|| न जानामि योगं जपं नैव पूजां नतोङहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् | जरजन्मदुःखौ घतातप्यमानं प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ||८|| रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।ये पठन्ति नरा भक्तया तेषां शम्भु: प्रसीदति॥ हर सोमवार को श्री रुद्राष्टकम का पाठ अवश्य करें ! अर्थ :- हे मोक्षस्वरूप, विभु, व्यापक, ब्रह्म और वेदस्वरूप, ईशान दिशा के ईश्वर तथा सबके स्वामी श्रीशिवजी! मैं आपको नमस्कार करता हूँ। निजस्वरूप में स्थित (अर्थात मायादिरहित), [मायिक] गुणों से रहित, भेदरहित, इच्छारहित, चेतन आकाशरूप एवं आकाश को ही वस्त्ररूप में धारण करने वाले दिगम्बर [अथवा आकाश को भी आच्छादित करने वाले] आपको मैं भजता हूँ॥१॥ निराकार, ओङ्कार के मूल, तुरीय (तीनों गणों से अतीत), वाणी, ज्ञान और इन्द्रियों से परे, कैलासपति, विकराल, महाकाल के भी काल,कृपालु, गुणों के धाम, संसार से परे आप परमेश्वर को मैं नमस्कार करता हूँ॥२॥ जो हिमाचल के समान गौरवर्ण तथा गम्भीर हैं, जिनके शरीर में करोडों कामदेवों की ज्योति एवं शोभा है, जिनके सिर पर सुन्दर नदी गङ्गाजी विराजमान हैं, जिनके ललाटपर बाल चन्द्रमा (द्वितीया का चन्द्रमा) और गले में सर्प सुशोभित हैं॥३॥ जिनके कानों में कुण्डल हिल रहे हैं, सुन्दर भ्रुकुटी और विशाल नेत्र हैं; जो प्रसन्नमुख, नीलकण्ठ और दयालु हैं;सिंहचर्म का वस्त्र धारण किये और मुण्डमाला पहने हैं; उन सबके प्यारे और सबके नाथ [कल्याण करने वाले] श्रीशङ्करजी को मैं भजता हूँ॥४॥ प्रचण्ड (रुद्ररूप), श्रेष्ठ, तेजस्वी, परमेश्वर, अखण्ड, अजन्मा, करोडों सूर्यो के समान प्रकाश वाले, तीनों प्रकार के शूलों (दु:खों) को निर्मूल करने वाले, हाथ में त्रिशूल धारण किये, भाव (प्रेम) के द्वारा प्राप्त होने वाले भवानी के पति श्रीशङ्करजी को मैं भजता हूँ॥५॥ कलाओं से परे, कल्याणस्वरूप, कल्पका अन्त (प्रलय) करने वाले, सज्जनों को सदा आनन्द देने वाले, त्रिपुर के शत्रु सच्चिदानन्दघन, मोह को हरने वाले, मन को मथ डालने वाले कामदेव के शत्रु, हे प्रभो! प्रसन्न होइये, प्रसन्न होइये॥६॥ जबतक, पार्वती के पति आपके चरणकमलों को मनुष्य नहीं भजते, तबतक उन्हें न तो इहलोक और परलोक में सुख-शान्ति मिलती है और न उनके तापों का नाश होता है। अत: हे समस्त जीवों के अंदर (हृदय में) निवास करने वाले प्रभो! प्रसन्न होइये॥७॥ मैं न तो योग जानता हूँ, न जप और न पूजा ही। हे शम्भो! मैं तो सदा-सर्वदा आपको ही नमस्कार करता हूँ। हे प्रभो! बुढापा तथा जन्म (मृत्यु) के दु:खसमूहों से जलते हुए मुझ दुखी की दु:ख से रक्षा कीजिये। हे ईश्वर! हे शम्भो! मैं आपको नमस्कार करता हूँ॥८॥ भगवान रुद्र की स्तुति का यह अष्टक उन शङ्करजी की तुष्टि (प्रसन्नता) के लिए ब्राह्मण द्वारा कहा गया। जो मनुष्य इसे भक्तिपूर्वक पढते हैं, उन पर भगवान् शम्भु प्रसन्न होते हैं॥९॥

Wednesday, 28 January 2015

Two words for Girls.

जो लडकिया लव के चककर मे पडकर अपने माँ-बाप को छोडकर घर से भाग जाती है मै उन लडकीयो के लिए कुछ कहना चाहुंगा . . बाबुल की बगिया में जब तू , बनके कली खिली, तुमको क्या मालूम की, उनको कितनी खुशी मिली । उस बाबुल को मार के ठोकर, घर से भाग जाती हो, जिसका प्यारा हाथ पकड़ कर, तुम पहली बार चली ॥ . . . तूने निष्ठुर बन भाई की, राखी को कैसे भुलाया, घर से भागते वक़्त माँ का आँचल याद न आया ? तेरे गम में बाप हलक से, कौर निगल ना पाया, अपने स्वार्थ के खातिर, तूने घर में मातम फैलाया ॥ . . . वो प्रेमी भी क्या प्रेमी, जो तुम्हें भागने को उकसाये, वो दोस्त भी क्या दोस्त, जो तेरे यौवन पे ललचाये । ऐसे तन के लोभी तुझको, कभी भी सुख ना देंगे, उलटे तुझसे ही तेरा, सुख चैन सभी हर लेंगे ॥ . . . सुख देने वालो को यदि, तुम दुःख दे जाओगी, तो तुम भी अपने जीवन में, सुख कहाँ से पाओगी? अगर माँ बाप को अपने, तुम ठुकरा कर जाओगी, तो जीवन के हर मोड पर, ठोकर ही खाओगी ॥ . . . जो - जो भी गई भागकर, ठोकर खाती है, अपनी गलती पर, रो-रोकर अश्क बहाती है । एक ही किचन में, मुर्गी के संग साग पकाती है, हुईं भयानक भूल, सोचकर अब पछताती है ॥ . . . जिंदगी में हर पल तू, रहना सदा ही जिन्दा, तेरे कारण माँ बाप को, ना होना पड़े शर्मिन्दा । यदि भाग गई घर से तो, वे जीते जी मर जाएंगे, तू उनकी बेटी है यह, सोच - सोच पछताएंगे l "माँ" एक ऐसी बैंक होती है , जहाँ आप अपनी हर 'भावना' और 'दुख' जमा कर सकते है, और. "पापा" एक ऐसे क्रेडिट कार्ड है जिनके पास बैलेंस न होते हुए भी हमारे सपने पूरे करने की कोशिश करते रहते हैं l Umrav Singh Rajput

Thursday, 22 January 2015

Dil ke sagar me lehren uthaya na kro.khwab bankar nind churaya na kro.

दिल के सागर मे लहरे उठाया ना करो, ख्वाब बनकर नींद चुराया ना करो, बहुत चोट लगती है मेरे दिल को, तुम ख्वाबो में आ कर यू तडपाया ना करो….

Wednesday, 21 January 2015

Jise tum Ishq karo wo mohabbat.....

जिसे तुम इश्क़ जिसे तुम इश्क़ करो वो मोहब्बत जो तुम्हे इश्क़ करे उस का क्या..? जिसके लिए तुम रोए वो मोहब्बत जो तुम्हारे लिए रोए उसका क्या..? जिसके लिए तुम तड़पे वो मोहब्बत जो तुम्हारे लिए तड़पा उसका क्या..? जिसे तुमने प्यार किया वो तुमको मिले और जिस को तुम ना मिले उसका क्या..?

Thursday, 15 January 2015

Pyar ki dastan

प्यार की दास्तान अपने दिल में तुम्हारे प्यार की दास्तान लिखी है, ना थोड़ी ना बहुत तमाम लिखी है ! कभी हमारे लिए भी दुआ कर लिया करो, क्यों की हमने अपनी हर इक साँस तुम्हारे नाम लिखी है !!

Tuesday, 13 January 2015

Happy sakranti.

यूँ तो हवा के रुख को समझती है पतंगें, फिर भी बुरे हालत से लड़ती है पतंगें, कटती है, उतरती है और चढ़ती है पतंगें, उम्मीद के धागे से ही बढ़ती है पतंगें, गिरती है, सम्हलती है, मचलती है पतंगें, बेखौफ तमन्नाओं सी उड़ती है पतंगे....

Sunday, 11 January 2015

Pyar ek haseen lamha hai usko jine wala chahiye.....

प्यार एक हसीन लम्हा प्यार एक हसीन लम्हा है उसको जीने वाला चाहिए प्यार एक सपनो की दुनिया है उसमे रहने वाला चाहिए प्यार एक विश्वास है उस पर साथ चलने वाला चाहिए प्यार एक खुशी है जिसको बाटने वाला चाहिए प्यार एक बेजूबा शब्द जिसको बोलने वाला चाहिए प्यार एक आशिकी है जिसका साथ निभाने वाला चाहिए प्यार एक गम भी है जिसमे आँसू पोछने वाला चाहिए प्यार एक साथ सुरो का संगम है जिसमे ताल मिलने वाला चाहिए प्यार एक दीवानगी है जिसमे खो जाने वाला चाहिए प्यार एक राज़ है जिसको समझने वाला चाहिए प्यार एक नादानी है उस्सा बाकचाने वाला चाहिए प्यार एक खामोशी है जिससे पढ़ने वाला चाहिए प्यार एक हीरा है जिसको खोजने वाला चाहिए प्यार एक एहसास है जिसको महसूस करने वाला चाहिए प्यार एक आधूरा शब्द है उसको पूरा करने वाला चाहिए प्यार एक रिश्ता है जिसको अपनाने वाला चाहिए प्यार एक जीवन है जिसके साथ जिंदगी बिताने वाला चाहिए..